
The mukhbir कृष्णा उपाध्याय, उमरिया-ताला। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 3 नवंबर से प्रारंभ हुआ तीन दिवसीय AITE 2026 प्रशिक्षण सत्र आज सफलता पूर्वक संपन्न हो गया। यह प्रशिक्षण सत्र इको सेंटर में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य बाघ गणना के अकादमिक और प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) दोनों पहलुओं पर मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करना था।
इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान भोपाल से आए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) एल. कृष्णमूर्ति ने अंतिम दिन फील्ड सत्र में भाग लिया। उनके साथ क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय और उप संचालक पी.के. वर्मा भी उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिकारियों ने फील्ड में डेटा संग्रहण के दौरान आने वाली कठिनाइयों, संभावित त्रुटियों और उनके समाधान पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
फील्ड में ट्रांसेक्ट लाइन और mSTRiPE ऐप का अभ्यास
फील्ड सत्र में प्रतिभागियों को तीन समूहों में विभाजित कर ट्रांसेक्ट लाइन गणना कराई गई। इस दौरान विशेषज्ञों की उपस्थिति में प्रतिभागियों ने mSTRiPE ऐप के माध्यम से रहवास प्लॉट्स की एंट्री की। साथ ही, सैंपल प्लॉट और पेलेट स्ट्रिप के लेआउट की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि वन्यजीव समूहों की बेयरिंग लेते समय होने वाली सामान्य त्रुटियों को सुधारने के लिए केंद्र के वन्यजीव को फोकस में रखते हुए बेयरिंग लेना जरूरी है। यह तकनीक सटीक डेटा एकत्र करने में सहायक होगी।
कैमरा ट्रैप में सावधानी, सही दिशा, दूरी और ऊंचाई का महत्व
फील्ड सत्र के बाद WII देहरादून के विशेषज्ञ आशीष प्रसाद और मास्टर ट्रेनर कमलेश नंदा ने क्लासरूम सेशन में प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया।
उन्होंने बताया कि कैमरा ट्रैप लगाने में दिशा, दूरी और ऊंचाई की गलतियों के कारण फोटो बर्न हो जाते हैं और “टाइगर की” पहचान नहीं हो पाती। साथ ही, कैमरा ट्रैप ID और लोकेशन के मिसमैच से डेटा परिष्करण में अनावश्यक संसाधनों की बर्बादी होती है।
इसलिए, बाघ गणना में सटीक परिणाम पाने हेतु सावधानीपूर्वक कैमरा ट्रैप इंस्टॉलेशन पर बल दिया गया।

वरिष्ठ अधिकारियों ने दी प्रेरणा और शुभकामनाएं
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एल. कृष्णमूर्ति ने सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे आगामी AITE 2026 बाघ गणना कार्य में उत्कृष्टता और समर्पण के साथ भाग लें।
समापन सत्र में उप संचालक पी.के. वर्मा ने मुख्य अतिथि सहित सभी प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं, क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने वन मंडलों से आए अधिकारियों के साथ AITE 2026 की तैयारियों की समीक्षा की और आगामी गणना कार्य को पूर्ण समर्पण के साथ करने के निर्देश दिए।
डॉ. सहाय ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री स्वस्ति श्री जैन और श्री महावीर पांडे की सराहना करते हुए उनके योगदान की प्रशंसा की।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का यह प्रशिक्षण न केवल वन्यजीव संरक्षण के प्रति गंभीरता का परिचायक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत का वन विभाग वैज्ञानिक विधियों से वन्यजीव संरक्षण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
By: TheMukhbir.com Special Correspondent – उमरिया/ताला, कृष्णा उपाध्याय





